सोमनाथ के ज्योतिर्लिंग का 24 अप्रैल को दिव्य दर्शन करेंगे कोरबा वासी
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का दिव्य दर्शन होगा कोरबा के घंटाघर में
कोरबा CGNEWS365.in सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का आगमन कोरबा में 24 अप्रैल हो रहा है।
आर्ट ऑफ़ लिविंग के तत्वाधान में होने वाले इस सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का दिव्या दर्शन कोरबा वीडियो को मिलेगा 1000 साल पुराने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग सभी के लिए सभी के दर्शन के लिए घंटाघर ओपन ऑडिटोरियम में 24 अप्रैल को रखा जाएगा।
आर्ट ऑफ लिविंग के पदाधिकारी के द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक रविशंकर नगर में आयोजित किया गया।
इस बैठक में सभी उपस्थित सदस्यों ने संकल्प लिया कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन कार्यक्रम को भव्य एवं सफल बनाया जाएगा।
कार्यक्रम स्थल के रूप में ओपन थिएटर, घंटाघर (कोरबा) को चयन किया गया ।
इसके साथ ही अधिक से अधिक लोगों तक कार्यक्रम को जानकारी पहुँचाने एवं सहभागिता बढ़ाने के लिए प्रचार-प्रसार की रणनीति पर चर्चा हुई।
हम सभी मिलकर इस दिव्य आयोजन को ऐतिहासिक सफलता प्रदान करें।
सोमनाथ की अनकही कथा
ऐसी कहानी के अनुसार पश्चिम गुजरात में सागर की लहरें धरती को स्पर्श करती थी, जहां एक ऐसा मंदिर स्थित था, जिसे देखकर ऋषि-मुनि कहते थे कि ये ईट- पत्थर से नहीं आस्था से बना है।” ये सोमनाथ मंदिर और इसके गृह में भगवान शिव का प्रथम ज्योतिर्लिंग विराजित था।
संत बताते थे कि यह ज्योर्तिलिंग चुंबकीय तत्व के कारण हवा में तैरता हुआ दिखाई देता था।
इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से जीवन भर का दुख समाप्त हो जाता था।
सन 1020 ईस्वी में मुस्लिम आक्रांताओं के द्वारा तोड़ा ।
क्योंकि इस मंदिर की महिमा, इसके वैभव और उस रहस्यमयी चुंबकीय मंडराते शिवलिंग के बारे में सुना और लोभ और ईर्ष्या के कारण उसने 1020 से 1024 ईस्वी में कई बार सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण लिया।
ओर हर बार वह निष्फल हुआ। हर बार शिवलिंग अडिग रहा लेकिन 1026 ईस्वी में 18 प्रयासों के बाद, वह मंदिर को तोड़ने में सफल हो गया।
शिवलिंग पर बारम्बार हुए आक्रमण के कारण उसके टुकड़े बिखर गए।
लेकिन ज्योर्तिलिंग की दिव्य शक्ति को कोई नष्ट नहीं कर सका।
कुछ संत और पुजारियों का एक समूह टूटे हुए शिवलिंग के कुछ टुकड़े को अपने साथ समेट कर ले गए।
वे सभी हजारों किलोमीटर दूर जंगलों को पर करके दक्षिण भारत पहुँचे । उन टुकड़ों को नया शिवलिंग रूप देकर अपने घर में पुनःस्थापित किया और उसे गुप्त रूप से रोज़ाना पूजा किया ।
लगभग एक हजार वर्षों तक इसकी पूजा करने के बाद सन 1924 में कांचीपुरम के शंकराचार्य जी ने संतों को कहा कि 2024 में राम मंदिर बनने के पश्चात इस ज्योतिर्लिंग को कर्नाटक के शंकर नाम के संत के हाथों को सौंप देना। पुजारियों ने सौ साल बाद 2025 में संत सीताराम शास्त्री जी बेंगलुरु पहुंचकर आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी को ज्योर्तिलिंग को समर्पित कर दिया।
इस ज्योर्तिलिंग को वैज्ञानिकों ने परीक्षण किया कि शिवलिंग अत्यधिक चुंबकीय है।
ऐसी शिवलिंग जिसमें ऊर्जा सामग्री उपलब्ध है जो दुनिया में कहीं पर नहीं है।इसमें ऐसी ऊर्जा है जिसे विज्ञान समझ नहीं पा रहा।
यह शिवलिंग हजार वर्षों तक सुरक्षित रहा,और अब ये कोरबा वासियों के दिव्य दर्शन हेतु 24 मार्च को घंटा घर में आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के द्वारा लाया जा रहा है।
संस्था के पदाधिकारियों के द्वारा निवेदन किया गया है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ज्योर्तिलिंग के दर्शन करके अपनी मनोकामनाएं पूरी करे।

